Part-Time Chairman and Additional (Independent) Director

श्री राजीव कुमार

1984 बैच के पूर्व IAS अधिकारी, छियासठ (66) वर्षीय श्री राजीव कुमार को 2017 -2020 से महत्वपूर्ण प्रणालीगत तनाव की अवधि के दौरान भारत के बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र की स्थिति को फिर से बेहतर बनाने में उनकी परिवर्तनकारी भूमिका के लिए व्यापक रूप से माना जाता है. वे फरवरी 2020 में भारत के फाइनेंस सेक्रेटरी के रूप में रिटायर हुए. रिटायरमेंट के बाद श्री कुमार ने कुछ समय के लिए पब्लिक एंटरप्राइजेज सिलेक्शन बोर्ड (PESB) के चेयरमेन के रूप में भी कार्य किया.

वित्तीय सेवा विभाग (2017-2020) के सेक्रेटरी के तौर पर उन्होंने ऐसे समय में कार्यभार संभाला, जब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे थे. इनमें बड़ी मात्रा में अघोषित NPA, पूंजी की कमी, नए क्रेडिट देने की क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव, गोल्ड प्लेटिंग की व्यापक प्रवृत्ति, इक्विटी और डेट फंड का अन्य उद्देश्यों के लिए मोड़कर नए क्रेडिट प्राप्त करने में उपयोग, बड़े बैंकिंग कंसोर्टियम से जुड़ी शासन संबंधी चुनौतियां, विमुद्रीकरण के बाद सूक्ष्म क्रेडिट की कमी को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे NBFC, और पोंजी स्कीम द्वारा नागरिकों के साथ की जा रही धोखाधड़ी जैसी समस्याएं मौजूद थीं.

श्री कुमार के वित्तीय सेवा विभाग में कार्यभार संभालने के मात्र दो सप्ताह के भीतर लगभग 3.38 लाख शेल कंपनियों के अकाउंट को ब्लॉक कर दिया गया था, जिसका उद्देश्य काले धन के नेटवर्क पर रोक लगाना था. इसके बाद पोंजी स्कीम पर रोक लगाई गई, और द बैनिंग ऑफ अनरेगुलेटेड डिपॉज़िट स्कीम्स एक्ट, 2019 पास किया गया. श्री कुमार ने दृढ़ नीतिगत नेतृत्व और प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की बैलेंस शीट को सुदृढ़ बनाने के लिए व्यापक सुधारों का नेतृत्व किया. इसके तहत उन्होंने NPA की पारदर्शी पहचान और उनके लिए आवश्यक प्रावधान सुनिश्चित किए और इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड फ्रेमवर्क के तहत उधारकर्ताओं की जवाबदेही को प्रभावी ढंग से लागू कराया. उनके दृष्टिकोण ने क्रेडिट अनुशासन को वापस बेहतर बनाने और लेनदार-देनदार के रिश्ते को सुधारकर लंबे समय से चली आ रही ट्विन बैलेंस शीट की समस्या को हल किया. रिकॉग्निशन, रिज़ॉल्यूशन, रीकैपिटलाइज़ेशन और रिफॉर्म्स की “4R रणनीति” पर आधारित इन प्रयासों से बैंकिंग क्षेत्र में तेज़ी से बदलाव आया, जिससे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक लगातार मुनाफे में लौट आए और एसेट की गुणवत्ता में सुधार हुआ.

श्री कुमार के कार्यकाल में बेहतर बैंकिंग व्यवस्था को बढ़ावा देने वाली कई महत्वपूर्ण पहलें लागू की गईं. उनके कार्यकाल के दौरान अवैध वित्तीय गतिविधियों के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई की गई, सहकारी बैंकों पर नियामकीय निगरानी को सुदृढ़ किया गया तथा बड़े डिफॉल्ट मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित की गई. ₹50 करोड़ या उससे अधिक के लोन के लिए पासपोर्ट विवरण देना अनिवार्य किया गया, जिससे ऐसे बड़े उधारकर्ताओं के देश छोड़कर भागने की संभावना पर रोक लगाई गई, जिनके विरुद्ध कार्रवाई की जा सकती थी. इसके अतिरिक्त, फ्रॉड जांच के तहत, ₹250 करोड़ से अधिक के लोन के लिए 25 तक बैंकों वाले बड़े बैंकिंग कंसोर्टियम की क्रेडिट प्रक्रिया में शामिल कमजोर संकेतों और कमजोर नियंत्रण प्रणाली को हटाकर विशेष निगरानी, तथा 34-से अधिक मानकों पर आधारित IT-आधारित रिस्क स्कोरिंग को लागू किया गया. लेनदार–देनदार संबंधों को पूरी तरह नए सिरे से स्थापित किया गया और स्पष्ट संदेश दिया गया कि लोन विवेकपूर्ण ढंग से दिया जाना चाहिए तथा देनदारों को लोन का भुगतान अवश्य करना होगा. इस परिवर्तन का एक प्रमुख आधार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का अभूतपूर्व रीकैपिटलाइज़ेशन था, जिसके तहत ₹3 करोड़ से अधिक की पूंजी उपलब्ध कराई गई, जिससे बैंकों की दायित्वों को पूरा करने की क्षमता और लोन देने की क्षमता को फिर से बेहतर बनाने में मदद मिली. इन प्रयासों को एक व्यापक समेकन अभियान से और मजबूत किया गया, जिसके तहत 27 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का विलय कर उन्हें 12 अधिक सशक्त बैंकों में परिवर्तित किया गया, साथ ही, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का युक्तिकरण कर उन्हें अधिक प्रभावी एक राज्य–एक RRB संरचना में व्यवस्थित किया गया. श्री कुमार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के इस समेकन का नेतृत्व किया. इन उपायों से सार्वजनिक बैंकिंग प्रणाली की परिचालन दक्षता, कार्यक्षेत्र और प्रतिस्पर्धात्मकता में उल्लेखनीय सुधार हुआ.

श्री कुमार ने बड़े एक्सपोजर के लिए विशेष निगरानी को संस्थागत रूप देकर और तकनीक संचालित जोखिम मूल्यांकन प्रणालियों को लागू करके बैंकों में शासन, जोखिम प्रबंधन और नियामक निगरानी को भी मज़बूत किया. उन्होंने जमाकर्ताओं की सुरक्षा और वित्तीय स्थिरता पर बराबर जोर दिया, जिसमें डिपॉज़िट इंश्योरेंस कवरेज को ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख करना शामिल है.

बैलेंस शीट की मरम्मत के अलावा, श्री कुमार ने वित्तीय सिस्टम में विकास पर ध्यान देने वाली और सबको साथ लेकर चलने वाली कोशिशें कीं. उन्होंने जन धन व्यवस्था के तहत वित्तीय समावेशन को तेज़ किया, बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच बढ़ाई और अंडरराइटिंग अनुशासन बनाए रखते हुए रिटेल, कृषि और MSME जैसे क्षेत्रों में क्रेडिट ग्रोथ को बढ़ाया. उनके

संकट के बाद NBFC क्षेत्र में लिक्विडिटी की चुनौतियों पर किए गए काम के साथ-साथ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के पुनर्गठन और बेहतर एक्सेस और उत्कृष्ट सेवा (EASE) एजेंडे के कार्यान्वयन जैसे सुधारों ने भारत की वित्तीय प्रणाली की सुविधाओं और विश्वसनीयता को और मज़बूत किया.

श्री कुमार ने भारत के 25वें चीफ इलेक्शन कमिश्नर के रूप में भी कार्य किया है; उनके नेतृत्व में लोक सभा के 2024 आम चुनावों के दौरान ~642 मिलियन मतदाताओं और ~312 मिलियन महिला मतदाताओं की भागीदारी के साथ विश्व रिकॉर्ड बने.

श्री कुमार भारत की वित्तीय व्यवस्था से जुड़े अधिकांश प्रमुख निकायों के सदस्य या चेयरपर्सन रहे. इनमें रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया का सेंट्रल बोर्ड, फाइनेंशियल स्टेबिलिटी एंड डेवलपमेंट काउंसिल, फाइनेंशियल सेक्टर रेगुलेटरी अपॉइंटमेंट्स सर्च कमेटी, अपॉइंटमेंट्स कमेटी ऑफ द कैबिनेट (ACC) के सेक्रेटरी, पब्लिक एंटरप्राइज़ेज़ सेलेक्शन बोर्ड, बैंक्स बोर्ड ब्यूरो, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया नाबार्ड के बोर्ड के सदस्य, सेंट्रल बैंक के इकोनॉमिक कैपिटल फ्रेमवर्क पर गठित विशेषज्ञ समिति और नीति आयोग के पुनर्गठन संबंधी समिति शामिल हैं.