हर घर की अपनी एक कहानी होती है, और अंशु व अनुराग लोइवाल का घर उन यादों से बना है और स्नेह से बनाया गया है. शादी के बाद जब अंशु इलाहाबाद से अजमेर आईं, तो वे केवल अपना सामान ही नहीं लाई थीं, बल्कि अपने बचपन की यादें भी साथ लाई थीं. यह ब्लॉग उनके उस सफर को दर्शाता है, जिसमें उन्होंने बिना उपयोगिता या व्यक्तिगतता से समझौता किए ऐसा घर बनाया, जो उनकी जड़ों, रचनात्मकता और अपनेपन को दर्शाता है.
अंशु का बचपन इलाहाबाद के उनके पुश्तैनी घर में बीता. उस घर का बगीचा उनके बचपन का सबसे अहम जगह था. वहीं खेलना, पढ़ना और शरारतें करना उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा था, स्वाभाविक है कि वे यादें उनके साथ बनी रहीं. 2002 में जब अंशु शादी के बाद अजमेर आईं, तो उन्हें बेहद खुशी हुई जब उन्हें मेयो कॉलेज क्षेत्र में एक ऐसा घर मिला जिसमें बगीचा भी था. अपनी यादों को साथ ले जाने के ख्याल से उन्होंने इलाहाबाद से एक कमल का पौधा लेकर आईं और उसे अपने नए बगीचे में लगाया. यह छोटा सा प्रयास उनके पुराने जीवन और उनकी नई जिंदगी को जोड़ने के बीच की कड़ी बन गई.
लोइवाल परिवार जब अपने नए घर में आया, तो उन्होंने उसके इंटीरियर की योजना बनानी शुरू की. एक आर्किटेक्ट ने घर की बुनियादी रूपरेखा तैयार की, लेकिन अंशु ने, अपनी बेटी की मदद से, बाकी सारा डिज़ाइन खुद किया. उनका उद्देश्य स्पष्ट था कि घर में सांस्कृतिक परंपरा के साथ आधुनिक डिज़ाइन भी हो.
लिविंग रूम पर सबसे पहले ध्यान दिया गया. इसे खुला, हवादार और रोशनी से भरपूर बनाया गया. यही वह जगह थी जहां परिवार अधिकतर समय साथ बिताता था, इसलिए यह आरामदायक और स्टाइलिश, दोनों होना ज़रूरी था. एक सादा सोफा सेट और मेल खाती कॉफी टेबल ने इसे रोज़मर्रा के पलों और मेहमानों के स्वागत के लिए एकदम उपयुक्त बना दिया.
अंशु को हमेशा से होम डेकोर का शौक रहा है. वे अपने घर को अपनी रचनात्मकता का एक कैनवास मानती हैं. अजमेर में आयोजित स्थानीय प्रदर्शनियों, खासकर दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान, वे अक्सर अनोखी सजावट की वस्तुएं कलेक्ट करने जाती हैं. ये छोटी-छोटी चीज़ें उनके घर में एक अलग पहचान जोड़ती हैं और हर कोने को खास बना देती हैं.
चार्टर्ड अकाउंटेंट उनके पति अनुराग घर से ही काम करते हैं और उनके लिए घर में एक अलग प्रवेश द्वार वाला ऑफिस स्पेस बनाया गया है. इस व्यवस्था से उन्हें प्रोफेशनल माहौल में काम करने के साथ-साथ परिवार से जुड़ाव भी बना रहता है. साथ ही, ऑफिस समय के बाद काम से आसानी से अलग हो जाना भी संभव होता है.
समय के साथ, उन्होंने होम लोन के ज़रिए एक और मंज़िल जोड़कर घर का विस्तार किया. अपनी जगह को अपनी ज़रूरत के अनुसार बनाने की क्षमता से उन्हें अपने घर पर गर्व हुआ और संतोष मिला.
अंशु के लिए पेंटिंग केवल एक शौक नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति का माध्यम है. उनकी छोटी बेटी को भी पेंटिंग का शौक है. दोनों मां-बेटी मिलकर पेंटिंग करती हैं, और कई कलाकृतियों से घर की दीवारों को सजाती हैं. लिविंग रूम में एक विशेष दीवार को किशनगढ़ के संगमरमर से सजाया गया है और लकड़ी के फ्रेम से घेरा गया है, जिससे उनकी पेंटिंग्स की पृष्ठभूमि सुंदर बन गई है और सबसे अलग दिखती हैं.
जैसे-जैसे उनकी बेटियां बड़ी हुईं, अंशु और अनुराग को एहसास हुआ कि उन्हें अपना एक अलग कमरा चाहिए. बच्चों के कमरे को गुलाबी रंग में रंगा गया और यह सिर्फ सोने की जगह नहीं है. यह लाइब्रेरी, बुलेटिन बोर्ड और खिलौने वाले जगह के साथ एक छोटा से प्ले स्कूल की तरह है. मूड लाइटिंग इसके आकर्षण को और बढ़ा देती है. यह कमरा उनकी दुनिया है, जिसमें उनकी पसंद की हर चीज़ मौजूद है.
इनका घर उनकी असल पहचान को दर्शाता है. यह गर्मजोशी, रचनात्मकता और उद्देश्य से भरा हुआ है. हर चीज़ और हर कमरा अनोखा है और अपने आप में महत्व रखता है. लोइवाल परिवार के लिए घर सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि खुशी, सुकून और अपनापन देने वाला स्थान है.
पूरे घर में अंशु ने छोटे-छोटे शांत कोने बनाए हैं, जिनका अलग-अलग मकसद है. खिड़की के पास उनका पढ़ने का कोना है, जहां हल्की रोशनी और आरामदायक कुर्सी है. बगीचे के पास एक मेडिटेशन की जगह भी है. ये छोटे लेकिन एहसासों से भरे कोने घर में सुकून और अपनापन महसूस कराते हैं और इसे और भी उपयोगी बनाते हैं.
घर सजाते समय अंशु ने पर्यावरण के अनुकूल चीज़ों का इस्तेमाल किया है. कई फर्नीचर पुराने सामान से फिर से बनाए गए हैं, और सजावटी चीज़ें स्थानीय कारीगरों से ली गई हैं. वह लोकल कारीगरों को सपोर्ट करने और कचरा कम करने में विश्वास करती हैं, यही वजह है कि उनके घर में दोबारा इस्तेमाल की गई लकड़ी, हाथ से बनी मिट्टी के बर्तन और प्राकृतिक कपड़े हैं.
अंशु अपने घर को मौसमी थीम के हिसाब से सजाती रहती हैं. जैसे दिवाली पर घर दीयों, हाथ से बने लालटेन और फूलों की सजावट से जगमगाता है. सर्दियों में, मुलायम कालीन और गर्म रंग के कुशन आरामदायक एहसास कराते हैं. यह तरीका पूरे साल घर को ताज़गी से भरा और ज़िंदादिल बनाए रखता है.
घर में कलात्मकता के साथ-साथ सुविधाओं का भी पूरा ध्यान रखा गया है. अंशु ने ऐसे स्टोरेज स्पेस बनाए हैं जो डिज़ाइन में घुल-मिल जाते हैं. बेड के नीचे ड्रॉअर, छिपी हुई बेंच स्टोरेज और मल्टी-पर्पज़ कैबिनेट्स घर को साफ-सुथरा रखते हैं और कुछ भी फैला हुआ नहीं दिखाई देता है. इससे घर में हमेशा खुलापन और स्वागत करने योग्य जैसा माहौल बना रहता है.
यह घर इसलिए भी खास है क्योंकि हर सदस्य ने इसमें अपना योगदान दिया है. अंशु और उनकी बेटी की बनाई कलाकृतियां, या अनुराग द्वारा सोच-समझकर बनाया गया ऑफिस स्पेस, हर किसी की सोच और मेहनत ने मिलकर इस घर को रूप दिया है. यह एक साझा प्रयास है जो उन्हें और भी करीब लाता है.
अंशु और अनुराग का घर सिर्फ दीवारों और फर्नीचर से नहीं बना है. यह यादों, मेहनत और प्यार से भरा हुआ है. हर कमरा एक कहानी कहता है, हर चीज़ एक याद समेटे हुए है, हर कोने में उनकी निजी पसंद झलकती है. यही वो बात है जो किसी मकान को घर बनाती है. लोइवाल परिवार दिखाता है कि जब आप अपने मूल्यों से जुड़े रहते हैं और पूरे परिवार को इस सफर का हिस्सा बनाते हैं, तो घर बनाना एक खुशियों भरी यात्रा बन जाता है.